कोरोना ने दुनियाभर में मचाई अफरा-तफरी राजधानी में 31 तक स्कूल, कॉलेज और सिनेमाघर बंद करने का आदेश जारी

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(अमेरिका और यूरोप के बाजार भी लगभग आठ से नौ फीसद की गिरावट में कारोबार कर रहे थे)
’ कारोबार में ठहराव के कारण भारत के निर्यात में 10 अरब डॉलर की कमी की आशंका
’ अर्थव्यवस्था में सुस्ती के चलते कर संग्रह भी लक्ष्य से कम रहने के आसार
दिल्ली-हरियाणा में महामारी घोषित
राजधानी में 31 तक स्कूल, कॉलेज और सिनेमाघर बंद करने का आदेश जारी
कोई नहीं बच पाया
सेंसेक्स व निफ्टी में कोई भी ऐसा सेक्टर नहीं है, जिसे गुरुवार को मार ना ङोलनी पड़ी हो। तेल व गैस सेक्टर में सबसे ज्यादा 9.82 फीसद, जबकि रियल्टी, आधारभूत सामान उद्योग व बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में औसतन नौ फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। हेल्थकेयर, आइटी जैसे सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट का रुख रहा है। इन वजहों से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 11.27 लाख करोड़ घटकर 125.86 लाख करोड़ रुपये रह गया है। गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में नए सिरे से मंदी का दौर शुरू हो गया है। वहां के प्रमुख शेयर बाजार एस एंड पी और डाउ जोंस में शुरुआती कारोबार में ही छह से आठ फीसद की गिरावट आ गई थी।
जयप्रकाश रंजन ’ नई दिल्ली
महामारी का रूप ले चुके कोरोना का कहर बाजार पर हावी है। दुनियाभर में निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई है। बाजार ध्वस्त हो रहे हैं। घरेलू शेयर बाजारों की हालत खस्ता है। गुरुवार को बीएसई के सेंसेक्स ने 2919 अंकों का गोता लगाया। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट है। एनएसई का निफ्टी भी 868 अंक गिरकर 9600 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे आ गया। इस एकदिनी गिरावट में निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए हैं।
कोरोना के कारण जिस तरह ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त पड़ने का खतरा मंडराया है, उससे दुनिया के तमाम शेयर बाजारों में कोहराम मचा है। गुरुवार को एक समय सेंसेक्स 3200 से ज्यादा गिर गया था। अंत में यह 2919.26 गिरकर 32,778.14 पर बंद हुआ। निफ्टी 868.25 अंक गिरकर 9,590.15 पर बंद हुआ। दोनों पिछले ढाई साल के न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी आगे भी बाजारों को राहत मिलती नहीं दिख रही है। अमेरिका व दूसरे यूरोपीय बाजारों में जिस तरह से गुरुवार को गिरावट का रुख रहा, उसे देखते हुए शुक्रवार भी भारतीय बाजारों के लिए बेहतर रहने के आसार नहीं हैं।
सेंसेक्स व निफ्टी ने तकरीबन दो महीने पहले यानी 14 जनवरी को अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ था। इसके बाद गिरावट का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। दो महीने में सेंसेक्स 9174 अंक गिर चुका है। गुरुवार को कई कंपनियों के शेयरों में 20 फीसद से ज्यादा की गिरावट हुई है। कोरोना का असर उन सेक्टर पर ज्यादा है, जो रोजगार पैदा करते हैं, मसलन पर्यटन से जुड़े उद्योग व ऑटोमोबाइल सेक्टर। दुनिया के तमाम देश इस संकट से जूझने में ही लगे हैं और वैश्विक स्तर पर इससे निपटने की कोई सोच नहीं उभर पा रही है, जैसा कि वर्ष 2007-08 की वैश्विक मंदी के दौरान हुआ था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस समय सभी देशों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है। अब भी यदि देश अपनी-अपनी समस्या से जूझने में लगे रहे, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत जल्द मंदी का शिकार हो सकती है।
डब्ल्यूएचओ और अमेरिका के एलान से सहमे निवेशक: गुरुवार को मची अफरा-तफरी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की तरफ से कोरोना को वैश्विक महामारी घोषित करना और ट्रंप प्रशासन की तरफ से कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए एहतियाती कदमों को जिम्मेदार बताया जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना से बचने के लिए ब्रिटेन के अलावा सभी यूरोपीय देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर अगले 30 दिन के लिए रोक लगा दी है। दुनियाभर की सरकारें जिस तरह सतर्कता बरत रही हैं, उससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका बढ़ गई है। दुनिया की तीनों सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं चीन, यूरोपीय संघ व अमेरिका में आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने से भारत की अर्थव्यवस्था को बहुत झटके ङोलने पड़ेंगे। ये तीनों भारत के सबसे बड़े कारोबारी साङोदार देश हैं।
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पेज 5,6,11,13,14,20 व संपादकीय

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