सिंधिया ने थामा कमल, कांग्रेस के रवैये पर उठाए सवाल

कहा, मोदी के हाथ में देश सुरक्षित, कांग्रेस वास्तविकता को नकारती है
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली
कांग्रेस के कद्दावर युवा नेताओं में शुमार ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों ने कमल थाम लिया है। होली के मौके पर कांग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी का रंग उड़ा देने वाले सिंधिया ने भाजपा के रंग में हाथ रंग लिए हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के साथ ही भाजपा में आने का संकेत दे चुके सिंधिया ने बुधवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ले ली। इस मौके पर उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी की नीतियों पर जमकर गुस्सा निकाला।
भाजपा के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और नड्डा को धन्यवाद देते हुए सिंधिया ने पीएम मोदी के हाथ में देश का भविष्य सुरक्षित होने का भरोसा जताया। इस दौरान कांग्रेस से उनकी निराशा भी झलक रही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वास्तविकता को नकारने लगी है। ऐसा पहले नहीं था। ध्यान रहे कि अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के विरोध पर उन्होंने कांग्रेस को पुनर्विचार करने की नसीहत दी थी। हाल में उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ‘कांग्रेस’ शब्द हटा लिया था। महाराज के नाम से पुकारे जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सरकार बने 15 महीने हो गए हैं और लोगों की सेवा करने का उनका सपना टूटा है। 10 दिन में ऋण माफी की बात की गई थी, लेकिन अब तक यह नहीं हो पाया है। रोजगार के अवसर नहीं हैं। भ्रष्टाचार बढ़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर नई सोच को आगे बढ़ने का अवसर नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में दो तिथि अहम हैं। पहला, 2001 का वह वक्त जब उनके पिता माधवराव सिंधिया गुजरे थे और दूसरा, 10 मार्च, 2020 जो उनकी 75वीं जन्म तिथि थी। इसी दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को बाय-बाय कहकर भाजपा के साथ चलने का संदेश दिया।
लंबे समय से चल रही थी कवायद : यूं तो ज्योतिरादित्य सिंधिया काफी अरसे से यह संदेश दे रहे थे कि वह कांग्रेस से नाराज हैं लेकिन खुले तौर पर भाजपा की ओर झुकाव का संकेत देने से बच भी रहे थे। माना जा रहा है कि पिछले एक पखवाड़े में जब उनकी नाराजगी चरम पर थी, तब भाजपा के कुछ नेताओं की ओर से संपर्क साधा गया था। इसमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, धर्मेद्र प्रधान का नाम प्रमुखता से आ रहा है। पार्टी प्रवक्ता जफर इस्लाम ने भी अहम भूमिका निभाई। दरअसल जफर सिंधिया के मित्रों में से रहे हैं और इसकी झलक उस वक्त दिखी भी जब भाजपा के मंच से सिंधिया ने दूसरे वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ जफर का भी नाम लिया। बाद में मंच से उतरते हुए भी जफर उनकी पीठ पर हाथ रखे हुए देखे गए। जफर 2014 से पहले मोदी से प्रभावित होकर भाजपा में आए थे। उससे पहले वह एक सफल बैंकर थे। बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में सिंधिया और जफर के बीच कई मुलाकातें हुईं। जब सिंधिया भाजपा में आने के लिए तैयार दिखने लगे तब पार्टी नेतृत्व ने तोमर और प्रधान को आगे बढ़ाया। जब उस स्तर पर बातचीत बढ़ी तब जाकर जेपी नड्डा और अमित शाह इसमें शामिल हुए। वैसे सूत्रों का कहना है कि सिंधिया कुछ और पहले ही भाजपा में आ गए होते अगर बीमारी के कारण पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन न हुआ होता।
बोले महाराज4 मप्र में पिछले 15 माह में एक भी वादा पूरा नहीं किया गया, राज्य में तबादला बन गया उद्योग, रेत खनन का बड़ा माफिया सक्रिय
नड्डा बोले, परिवार का सदस्य लौट आया है
अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भाजपा और जनसंघ में ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया के योगदान को याद करते हुए उनका पार्टी में स्वागत किया। नड्डा ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का आना परिवार के एक सदस्य के आने जैसा है। ध्यान रहे कि सिंधिया की दोनों बुआ वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे भाजपा की सक्रिय सदस्य व वरिष्ठ नेता हैं।
कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को नई दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के दौरान। उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। प्रेट्र
मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया
पार्टी में शामिल होने के साथ ही भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाने का एलान कर दिया है। माना जा रहा है कि बजट सत्र की समाप्ति के बाद संभावित कैबिनेट विस्तार में सिंधिया को केंद्र सरकार में भी स्वतंत्र प्रभार के मंत्री की कुर्सी मिल सकती है। मध्य प्रदेश में भी इसका असर दिखेगा जहां सिंधिया खेमे के लगभग दो दर्जन विधायकों की बगावत ने कमलनाथ सरकार की नींव हिला दी है।

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