कोरोना वैक्सीन का सेकंड फेज का ट्रायल आज से:पुणे के हॉस्पिटल में 6 लोगों को दी जाएगी कोविशील्ड की खुराक, इस साल के अंत तक उपलब्ध हो सकती है वैक्सीन

 

  • सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला के मुताबिक, वैक्सीन इस साल के अंत तक उपलब्ध हो सकती है
  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और वैक्सीन अलायंस संस्था गावी के साथ एक करार किया है

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी भारत के सीरम इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार कर रही हैं। भारत में यह वैक्सीन कोविशील्ड (AZD1222) के नाम से लॉन्च होगी। पुणे में आज से इसके फेज-2 का हृयूमन ट्रायल शुरू हो रहा है। आज दोपहर 1 बजे भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 6 लोगों को इसकी खुराक लगाई जाएगी। यहां कुल 300 से 350 लोगों आने वाले समय में यह वैक्सीन दी जानी है।

पुणे स्थित भारती विद्यापीठ के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजय लालवानी ने बताया कि हमने परीक्षण के लिए 6 व्यक्तियों का चयन किया है। इन लोगों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया चल रही है। आरटी-पीसीआर और एंटीबॉडी परीक्षण किए जा रहे हैं। अगर सबकुछ अनुकूल रहा तो बुधवार को इन्हें वैक्सीन की खुराक दी जाएगी।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने देश में वैक्सीन की 1 बिलियन खुराक का उत्पादन करने के लिए ब्रिटिश-स्वीडिश दवा फर्म एस्ट्राजेनेका के साथ समझौता किया है।

अब तक वैक्सीन सुरक्षित साबित हुई

मेडिकल जर्नल लैंसेट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है। इस जानकारी के बाद ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन फ्रंट रनर वैक्सीन की लिस्ट में आगे गई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी कहा है कि AZD1222 नाम की इस वैक्सीन को लगाने से अच्छा इम्यून रिस्पॉन्स मिला है।

वैक्सीन ट्रायल में लगी टीम और ऑक्सफोर्ड के निगरानी समूह को इस वैक्सीन में सुरक्षा को लेकर कोई चिंता वाली बात नजर नहीं आई।

थर्ड फेज को भी मिली है मंजूरी
3
अगस्त को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने देश में सेकेंड और थर्ड फेज हृयूमन ट्रायल के लिए सीरम संस्थान को इजाज दी है। क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री-इंडिया के मुताबिक कोविशिल्ड की दो-खुराक पार्टीसिपेंट्स को दिया जाएगा।

73 दिनों में दवाई लाने के दावे को इंस्टिट्यूट ने गलत कहा
इस बीच दो दिन पहले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार ने संभावित कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर कंपनी को केवल उत्पादन और भविष्य में इस्तेमाल के लिए स्टॉक तैयार करने की अनुमति दी है। कोविशील्ड की उपलब्धता को लेकर मीडिया में चल रहे दावे पूरी तरह झूठे और खुद से मान लिए गए हैं।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया कि 73 दिनों के अंदर कोविशील्ड वैक्सीन बाजार में जाएगी और भारतीयों का फ्री में वैक्सीनेशन होगा। इन रिपोर्ट्स को लेकर ही सीरम इंस्टीट्यूट ने स्पष्टीकरण जारी किया है। सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से कहा गया कि कोविशील्ड को ट्रायल्स में सफल साबित होने और सभी जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिल जाने के बाद ही कमर्शियलाइज्ड किया जाएगा।

विदेश से इस वैक्सीन की डिमांड रही है

सुखद जानकारी यह सामने रही है कि ट्रायल से पहले सीरम इंस्टिट्यूट ने इस ट्रायल से पहले ही बड़ी तादाद में वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के चीफ एग्जिक्यूटिव अदार पूनावाला ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बहुत कम लोग ही इतनी कम कीमत पर कोरोना वैक्सीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर कर सकते हैं। वह भी इतनी तेजी के साथ। कोरोना वैक्सीन की पहली खेप के लिए मेरे पास देश-विदेश से कई नेताओं के फोन रहे हैं। मुझे समझाना पड़ता है कि मैं ऐसे ही आपको वैक्सीन नहीं दे सकता हूं।

प्रति मिनट के हिसाब से 500 वैक्सीन बना लेने का दावा
सीरम ने दावा किया है कि प्रति मिनट के हिसाब से 500 डोज तैयार हो रहा है। हालांकि, कितनी मात्रा में वैक्सीन तैयार होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। खुद इतनी बड़ी आबादी वाले भारत में वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में पूनावाला भारत और बाकी दुनिया में 50-50 के हिसाब से बंटवारा कर सकते हैं।

गावी और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ किया समझौता
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और वैक्सीन अलायंस संस्था गावी के साथ एक करार किया है। इस करार के तहत भारत और निम्न आय वाले 92 देशों को मात्र 3 डॉलर यानी 225 रुपए में वैक्सीन मिल सकेगी।

गेट्स फाउंडेशन वैक्सीन के लिए गावी को फंड उपलब्ध कराएगा, जिसका इस्तेमाल सीरम इंस्टीट्यूट वैक्सीन तैयार करने और वितरित करने में करेगा। वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल पूरे होते ही इसके उपलब्ध होने की सम्भावना है। सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला के मुताबिक, वैक्सीन इस साल के अंत तक उपलब्ध हो सकती है।

निर्माण से पहले वैक्सीन को इन चरण से गुजरना पड़ता है

वैक्सीन को निर्माण से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ता है। देश के पूर्व ड्रग कंट्रोलर जनरल जीएन सिंह ने भास्कर को बताया कि वैक्सीन हम तक कैसे पहुंचती है, वैक्सीन बनाने से पहले क्या प्रोसेस अपनाई जाती है...

1 वायरस की जांच-पड़तालः पहले शोधकर्ता पता करते हैं कि वायरस कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करता है। वायरस प्रोटीन की संरचना से देखते हैं कि क्या इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए उसी वायरस का इस्तेमाल हो सकता है। उस एंटीजन को पहचानते हैं, जो एंटीबॉडीज बनाकर इम्यूनिटी बढ़ा सकता है।

2 प्री-क्लिनिकल डेवलपमेंटः मनुष्यों पर परीक्षण से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई टीका या दवा कितना सुरक्षित है और कारगर है। इसीलिए सबसे पहले जानवरों पर परीक्षण किया जाता है। इसमें सफलता के बाद आगे का काम शुरू होता है, जिसे फेज-1 सेफ्टी ट्रायल्स कहते हैं।

3 क्लिनिकल ट्रायलः इसमें पहली बार इंसानों पर परीक्षण होता है, इसके भी 3 चरण

पहला चरणः 18 से 55 साल के 20-100 स्वस्थ लोगों पर परीक्षण। देखते हैं कि पर्याप्त इम्यूनिटी बन रही है या नहीं। दूसरा चरणः 100 से ज्यादा इंसानों पर ट्रायल। बच्चे- बुजुर्ग भी शामिल। पता करते हैं कि असर अलग तो नहीं।

तीसरा चरणः हजारों लोगों को खुराक देते हैं। इसी ट्रायल से पता चलता है कि वैक्सीन वायरस से बचा रही है या नहीं। सब कुछ ठीक रहा तो वैक्सीन के सफल होने का ऐलान कर दिया जाता है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts

किसान आंदोलन की 10 फोटो:कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब-हरियाणा में तनाव, पुलिस ने दिल्ली जाने से रोका तो किसान सड़कों पर ही बैठ गए

  केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। फोटो करनाल के समाना बाहू इलाके की है। केंद...