आईपीएल:आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सरशिप की दौड़ में पतंजलि के बाद अनअकेडमी भी मैदान में, बायजू और अमेजन भी रेस में शामिल

 

आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए बीसीसीआई भारतीय नाम तलाश रही है। इस साल आईपीएल का आयोजन 19 सितंबर से दुबई में होने जा रहा है।

  • आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप से वीवो को हटाया गया
  • भारतीय कंपनियों में बायजू और अनअकेडमी का नाम सबसे ऊपर

आईपीएल 2020 के टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए पतंजलि के बाद अब एजुकेशनल टेक कंपनी अनअकेडमी भी मैदान में गई है। चीनी कंपनी वीवो को आईपीएल से हटाने के बाद अब तक दो भारतीय कंपनियों ने स्पॉन्सरशिप की इच्छा जताई है। बीसीसीआई ने स्पॉन्सरशिप की रकम को भी घटा दिया है। अनअकेडमी अभी सेंट्रल स्पॉन्सरशिप पूल का हिस्सा है। पतंजलि और अनअकेडमी के साथ बायजू और अमेजन भी टाइटल स्पॉन्सरशिप के रेस में शामिल है।

पिछले दिनों आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सरशिप से वीवो को हटा दिया गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भारतीय मूल की कंपनियों को लुभाने के लिए स्पॉन्सरशिप की रकम को पहले की तुलना में कम कर दिया है। पहले यह रकम 440 करोड़ रुपए सालाना थी। लेकिन बोर्ड ने इसको अब 300 से 350 करोड़ रुपए सालाना कर दिया है।

बायजू और अमेजन भी इस रेस में शामिल

स्पॉन्सरशिप की इस दौड़ में अनअकेडमी के आने से पतंजलि लिए सौदा महंगा हो सकता है। बोर्ड ने सेंट्रल स्पॉन्सरशिप के लिए आवेदन मांगे है। आवेदन के लिए 14 अगस्त आखिरी डेट निर्धारित की गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए अभी तक सिर्फ पतंजलि और अनअकेडमी ने ही फॉर्म लिए हैं। लेकिन एजुकेशनल फर्म बायजू और अमेजन भी इस रेस में शामिल हैं। बता दें कि अभी इस पर आधिकारिक स्टेटमेंट नहीं जारी किया गया है। बता दें कि बायजू भारतीय क्रिकेट टीम को स्पांसर करती है। वहीं अनअकेडमी अभी आईपीएल में सेंट्रल स्पॉन्सरशिप पूल का हिस्सा है। कंपनी वर्ष 2020 से 2023 तक के लिए आईपीएल के सेंट्रल स्पॉन्सरशिप का हिस्सा रहेगी। इसमें ड्रीम 11 और पेटीएम जैसी देसी कंपनियां भी शामिल हैं।

सेंट्रल स्पॉन्सरशिप और टाइटल स्पॉन्सरशिप में क्या है अंतर ?
आईपीएल के सेंट्रल स्पॉन्सरशिप में देसी कंपनियों का ही बोलबाला है। इसमें अनअकेडमी के साथ-साथ पेटीएम और ड्रीम 11 जैसी देसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि सेंट्रल और टाइटल स्पॉन्सरशिप दोनों के अधिकार अलग अलग हैं। आईपीएल में सेंट्रल स्पॉन्सरशिप के तहत जर्सी के अधिकार नहीं आते हैं। यानि जर्सी पर छपे लोगो पर केवल टाइटल स्पॉन्सरशिप का ही अधिकार होता है। नीलामी में सबसे ज्यादा रकम अदा करने के बाद बोर्ड द्वारा इसके अधिकार संबंधित कंपनी को सौंप देती है। जानकारों का कहना है कि कंपनी को अपने ब्रांडिंग के लिए मैच के बाद का प्रजंटेशन एरिया, डग आउट में बैकड्रॉप और बाउंड्री रोप जैसे बढ़िया स्पेस मिलते हैं।

वीवो ने टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए दिए थे भारी रकम
टाइटल स्पॉन्सरशिप से वीवो को हटाए जाने के बाद इसके विकल्प में योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि का नाम सबसे आगे चल रहा था। लेकिन अब इस रेस में अनअकेडमी और बायजू भी शामिल हो गया है। बता दें कि अनअकेडमी में 100 फीसदी निवेश भारतीय है। वीवो ने आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सरशिप के अधिकार 5 साल के लिए थे। इसके लिए वीवो को नीलामी के कुल 2,190 करोड़ रुपए बोर्ड को अदा किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने सालाना 440 करोड़ रुपए दिए। यह अनुबंध साल 2018 से साल 2022 तक का है।

चीन के साथ गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीनी सामानों और कंपनियों के खिलाफ देशभर में आवाजें उठने लगी थीं। बीसीसीआई पर भी चीनी कंपनियों को स्पॉन्सरशिप से हटाने का दबाव था। जिसके बाद चीनी मूल की कंपनी वीवो को आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सरशिप हटा दिया गया। कोरोना के चलते देरी से शुरु होने वाले आईपीएल भले ही विदेश में हो रहा है लेकिन माना जा रहा है कि इस बार इसमें जोरदार देसी तड़का लगेगा।

आईपीएल में होती है पैसों की बारिश
रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2019 में आईपीएल से स्टार स्पोर्ट्स ने विज्ञापन के माध्यम से 2000 करोड़ रुपए और 2018 में 1800 से 2000 करोड़ रुपए का लाभ कमाया था। बता दें कि स्टार स्पोर्ट्स के पास ही आईपीएल के ब्रॉडकास्टिंग का अधिकार है। जानकार कहते हैं कि कंपनियां विज्ञापन के माध्यम से आईपीएल में क्रिकेट विश्व कप के मुकाबले अधिक पैसा कमाते हैं। दरअसल विश्व कप की तुलना में आईपीएल में ज्यादा मैचों का आयोजन किया जाता है।

 

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