हेल्प डेस्क:थानों में अभी तक सिर्फ एक टेबल-कुर्सी पर है महिला डेस्क, अब जगी सुधार की उम्मीद

 

            राज्य के गृह विभाग ने प्रत्येक पुलिस थाने के लिए मंजूर किए एक लाख रुपए

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस थानाें में महिला डेस्क की मजबूती फिलहाल कागजों में अटकी है। अजमेर जिले में 34 पुलिस थानाें में ज्यादातर महिला डेस्क के नाम पर थाने के स्टाॅफ के साथ एक टेबल और कुर्सी की व्यवस्था है, लेकिन नियमानुसार महिला अधिकारी, पीड़िताओं से पूछताछ के लिए अलग से रूम और अन्य साधन होने चाहिए।

यही कारण है कि महिलाएं थाने-चाैकियाें में शिकायत लेकर जाने से अभी भी डरती हैं। मजबूरी में महिला परिवादियाें काे पुरुष पुलिस कर्मियाें से ही रूबरू हाेना पड़ता है। राज्य सरकार के गृह विभाग की मंजूरी के बाद अब थानों में महिला डेस्क को मजबूत बनाने का काम शुरू हो गया है।

यह सुविधाएं मुहैया करानी हैं
पुलिस मुख्यालय के अनुसार प्रत्येक थाने में महिला डेस्क के लिए 2 मेज, 10 कुर्सी, 1 कंप्यूटर टेबल, आलमारी, दो मोबाइल फाेन, सबूत संग्रह और लघु वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए मेमोरी स्टिक के साथ डिजिटल कैमरा, लेपटॉप इंटरनेट की सुविधाएं मुहैया कराई जानी है।

अजमेर जिले में एक ही महिला थाना ....इसलिए महिला डेस्क की जरूरत
देशभर में कुल 15,579 पुलिस थाने हैं, जबकि महिला थाने सिर्फ 613 ही हैं। अजमेर जिले में एक ही महिला थाना है। महिला पुलिस थानों में यौन हिंसा, दहेज के लिए अत्याचार, घरेलू हिंसा आदि की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा को छोड़कर बाकी हर तरह की हिंसा और उत्पीड़न के लिए कार्रवाई संबंधित थाने में ही होती है, महिला थाने में नहीं हाेती। ऐसे में अगर कोई महिला यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर महिला थाने जाए तो उसे वहां त्वरित मदद नहीं मिलती है।

उसे संबंधित सामान्य थाने में ही शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। महिला थाना जहां समझौता कराने पर जोर देते हैं वहीं सामान्य पुलिस स्टेशनों में तुरंत शिकायत दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई हाेती है। महिला डेस्क मजबूत हाेने से पीड़ित महिलाओं को सुविधा मिलेगी।

देशभर में निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपए का बजट
योजना के तहत देश के 10,000 और राजस्थान में 500 पुलिस स्टेशनों में महिला डेस्क स्थापित किए जाने हैं। केन्द्र की ओर से महिला डेस्क के लिए देशभर के लिए निर्भया फंड के नाम से 100 करोड़ रुपए का बजट मंजूर है। राज्य गृह विभाग ने हेल्प डेस्क के लिए प्रत्येक पुलिस थाने को एक लाख रुपए की मंजूरी दी है।

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