मुजफ्फरपुर:पिछले चुनाव में 9 सीटों पर लड़ी थी भाजपा, दो लोजपा और हम के खाते में; दो विधायकों के जदयू में आने से बदल गया समीकरण

 


शिशिर कुमार) विधानसभा चुनाव का ऐलान हुए एक सप्ताह बीत गए। अबतक सीटों का बंटवारा नहीं हाे पाया है। लेकिन, जिले में उभर रहे सीन में कई सीटों पर भाजपा की उम्मीदवारी कम होने के आसार दिख रहे हैं। दरअसल, दो विधायकों के जदयू में आने से एनडीए का समीकरण बदल गया है। विधानसभा 2015 के चुनाव में भाजपा जदयू से अलग हाेने के कारण 11 सीटों में से 9 पर चुनाव लड़ी थी।

2 सीटें बोचहा और कांटी लोजपा और हम के खाते में गई। 9 में तीन मुजफ्फरपुर, कुढ़नी और पारू में भाजपा को जीत मिली। बोचहा से निर्दलीय जीतीं बेबी कुमारी अब भाजपा में हैं। पार्टी इन 4 सीटों पर तो दावेदारी पक्की मान कर चल रही है। लेकिन, अन्य 7 सीटों में कई पर पेच फंस सकता है।

  • इन सीटों पर है भाजपा का कब्जा: मुजफ्फरपुर, कुढ़नी, बोचहां, पारू
  • इन सीटों पर जदयू के विधायक: कांटी, गायघाट
  • इन सीटों को लेकर ज्यादा खींचतान: मीनापुर, साहेबगंज, बरुराज, औराई, कांटी।
  • चार सीटों पर दावेदारी पक्का मान रही भाजपा, सात पर फंस सकता है पेच

गठबंधन धर्म: भाजपा काे घटक दलों के लिए छाेड़नी ही पड़ेंगी कुछ सीटें

महागठबंधन में जदयू को तीन सीटें मुजफ्फरपुर, कुढ़नी और बोचहां में मिली थीं। तीनों ही सीटें पार्टी हार गई। हालांकि, कांटी से निर्दलीय जीते अशोक चौधरी और गायघाट से जीते राजद के महेश्वर यादव अब जदयू में हैं। अशोक चौधरी की इस बार सकरा से दावेदारी है। ऐसे में जदयू इन तीन सीटों पर तो आश्वस्त है ही, पार्टी नेताओं की नजर इससे आगे उन सभी सीटों पर है जहां बीते चुनाव में भाजपा हारी थी।

जिला भाजपा भी 7-3-1 के फार्मूले की उम्मीद लगाए नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रही है। यानी 7 पर भाजपा, 3 पर जदयू और 1 पर लोजपा। यदि ऐसा भी हुआ तो पार्टी को गत चुनाव की तुलना में कम से कम दो सीटें गठबंधन के साथियों काे देनी हाेगी।

सूत्रों की मानें तो भाजपा ने लोजपा को जिन 27 सीटों का ऑफर दिया है, उसमें जिले की बरूराज सीट भी है। इसके अलावा मीनापुर, साहेबगंज और औराई सीट को लेकर भाजपा खेमे में काफी बेचैनी है। फिलहाल सबकी निगाहें नेतृत्व के निर्णय पर टिकी हैं। लेकिन सीट शेयरिंग में उलटफेर हुआ तो विरोध का स्वर उठना तय है।

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