घूमने के शौक की खातिर जॉब छोड़ी:हैदराबाद के रम्या और गंगाधर ने 90 दिनों में 15 राज्यों की सैर की, 13,000 किमी यात्रा करने वाला ये कपल अपनी बेटियों के लिए 'रोड़ स्कूलिंग' को मानता है बेस्ट

 


  • इस कपल का कहना है कि यात्रा के दौरान बच्चे जितना सीख सकते हैं, वो स्कूल में पढ़ते हुए उन्हें कोई टीचर या पैरेंट्स नहीं सीखा सकते
  • गंगाधर और उनकी पत्नी रम्या दोनों को घूमने-फिरने का शौक इस हद तक है जिसके चलते अपनी दो छोटी जुड़वा बेटियों के साथ भी उन्होंने इस शौक को पूरा किया

हैदराबाद के एक कपल ने 90 दिनों में 15 राज्यों की सैर की। इस सफर में उनके साथ पत्नी रम्या और दो जुड़वा बेटियां भी शामिल थी। गंगाधर कहते हैं उन्होंने हर बार यात्रा के नए तरीकों को अपनाया। घूमने-फिरने के शौकीन इस कपल के लिए ये सबसे लंबा टूर था जो बेहद यादगार रहा।

13,000 किलोमीटर का सफर पूरा करने वाले कपल ने इस बात का भी ध्यान रखा कि इतने लंबे समय तक यात्रा के दौरान उनकी बेटियों की पढ़ाई प्रभावित हो। इसके लिए उन्होंने 'रोड़ स्कूलिंग' को चुना।

गंगाधर का कहना है कि ''मैं पिछले 17 सालों से कार्पोरेट सेक्टर में काम कर रहा हूं। मुझे ट्रैवलिंग का बहुत शौक है। अपने इस शौक को पूरा करने के लिए मैंने दो साल पहले नौकरी छोड़ी दी ताकि मैं फुल टाइम ट्रेवलर बन सकूं। नॉर्थ ईस्ट इंडिया और भूटान के बारे में मुझे काफी जानकारी है। पिछले साल मैंने 7 महीनों तक नॉर्थ ईस्ट इंडिया की सैर की थी। इनमें से चार महीने तक परिवार मेरे साथ रहा। उसके बाद तीन महीने मैंने सोलो ट्रेवलिंग की''


गंगाधर और उनकी पत्नी रम्या दोनों को घूमने-फिरने का शौक इस हद तक है जिसके चलते अपनी दो छोटी जुड़वा बेटियों के साथ भी उन्होंने घूमना जारी रखा। वे नहीं चाहते कि बच्चों के जन्म के बाद दूसरे लोगों की तरह वे भी अपनी बेटियों को शौक पूरा कर पाने का दोष दें। उनकी बेटियों के नाम अमूल्या और अनन्या हैं जिनके साथ उन्होंने कई स्थानों का मजा लिया। पहली बार ये कपल अपनी बच्चियों को उस वक्त घूमने लेकर गया जब उनकी उम्र छह महीने थी।

इस कपल का कहना है कि ''यात्रा के दौरान बच्चे जितना सीख सकते हैं, वो स्कूल में पढ़ते हुए उन्हें कोई टीचर नहीं सीखा सकती। होम स्कूलिंग के जरिये भी बच्चों के लिए स्कूल जैसा माहौल मिलना मुश्किल होता है। अगर कोई यह कहे कि शिक्षा सिर्फ घर की चार दीवारों में बैठकर पाई जा सकती है तो यह बात पूरी तरह गलत है। बच्चों को सुंदर प्राकृतिक दृश्य सिखाने के साथ ही इंसानियत का संदेश देने में भी यात्रा सबसे अच्छा माध्यम है''

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