DHFL की दीवालिया प्रक्रिया:अडानी के दोबारा बोली लगाने के बाद दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन की फिर से होगी नीलामी

 

               DHFL के लिए संशोधित बोली जमा करने की समय सीमा 9 नवंबर को समाप्त हो गई थी

  • पीरामल एंटरप्राइजेज लिमिटेड और ओकट्री ने अडानी की इस नई बोली पर आपत्ति जताई है
  • अडानी ने समय सीमा बीत जाने के बाद शनिवार को फिर से ज्यादा ऊंची बोली लगा दी है

दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) के लिए अडानी ग्रुप की ज्यादा ऊंची बोली आने के बाद अब DHFL के कर्जदाता इस दीवालिया कंपनी के लिए फिर से बोली आमंत्रित कर सकते हैं। जानकार सूत्रों ने बताया कि कर्जदाता मंगलवार को ही फिर से बोली आमंत्रित कर सकते हैं। DHFL के लिए संशोधित बोली जमा करने की समय सीमा 9 नवंबर को खत्म हो जाने के बाद शनिवार को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने DHFL के लिए पहले से ऊंची बोली लगा दी।

संशोधित बोली में पीरामल एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने DHFL के रिटेल बुक के लिए 25,000 करोड़ रुपए ऑफर किए हैं। ओकट्र्री ने पूरी कंपनी के लिए 31,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई है। अडानी ने सिर्फ होलसेल/स्लम रीडेवलपमेंट अथॉरिटी (SRA) बुक्स के लिए करीब 2,700 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी।

अडानी की नई बोली ओकट्री के मुकाबले 250 करोड़ रुपए ज्यादा

अडानी ने हालांकि अचानक पूरी कंपनी के लिए ओकट्री की बोली से 250 करोड़ रुपए ज्यादा ऊंची बोली लगाने का फैसला किया। पीरामल और ओकट्री ने अडानी की नई बोली पर आपत्ति जताई है। सूत्रों ने कहा कि पीरामल ने DHFL के कर्जदाताओं को पत्र भी लिखा है। इन कर्जदाताओं में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भी शामिल है।

कानूनी लड़ाई और नीलामी में देरी से बचने के लिए कर्जदाता अंतिम बोली की प्रक्रिया फिर शुरू करेंगे

एक सूत्र ने कहा कि पीरामल ने SBI को लिखा है कि यदि अडानी की बोली स्वीकार की जाती है, तो वह कानूनी कदम उठाएगी। कानूनी लड़ाई और नीलामी में देरी से बचने के लिए कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) अंतिम बोली लगाने की प्रक्रिया फिर से शुरू करेंगे। इससे कोई भी बोलीदाता प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे और DHFL को खरीदने के लिए वे नई या संशोधित बोली जमा कर सकेंगे।

पीरामल क्यों कर रहा है अडानी की नई बोली का विरोध

पीरामल ने कहा है कि CoC यदि अडानी की बोली को स्वीकार करता है, तो वह और अन्य सभी बोलीदाता नीलामी की दौर से बाहर हो जाएंगे। अडानी की नई बोली इंसॉल्वेंसी कानून के प्रावधानों के मुताबिक नहीं है। उसने कहा कि अडानी ने नई बोली के लिए जो समय चुना है, उससे इस रिक्वेस्ट फॉर रिजॉल्यूशन प्लान की सारी कवायद खराब हो जाएगी और रिजॉल्यूशन प्लान पेश करने के लिए हमारी व अन्य कंपनियों द्वारा की गई सारी मेहनत बेकार हो जाएगी।

जमा किए गए प्लान के लीक होने का भी जताया संदेह

पीरामल ने यह भी कहा कि इंसॉल्वेंसी नियमों के तहत समय सीमा बीत जाने के बाद अनसॉलिसिटेड या संशोधित रिजॉल्यूशन प्लोन पेश नहीं किए जा सकते हैं। एडमिनिस्ट्रेटर रिजॉल्यूशन योजना को फिर से तभी शुरू कर सकता है, जब जमा किए गए प्लान संतोषजनक न हों। पीरामल ने जमा किए गए प्लान के लीक होने का भी संदेह जताया और इस मामले की जांच किए जाने की मांग की है।

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